Thursday, 13 September 2012

कोई वादा नहीं

कोई वादा नहीं  किया था  तुमने
बस नज़रों को झुका दिया था तुमने

अब भी  ख़ुशबू  है, मेरे  हाथों में
बरसों  पहले  छू लिया था तुमने

तार-तार कमीज़ से अब भी जुड़ा है
जिस टूटे बटन को सिया था तुमने

ये ख़ुशी तो है किसी  काम आया
मेरे कांधे पर  रो लिया था तुमने

2 comments:

  1. अब बोलेगी कविताएँ आपकी
    नाचेंगी किताबें संग संग
    आपके इस ब्लाग को विश्व दर्शन करा दूँगी
    कृपया फॉलो कीजिये
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/
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    सादर
    यशोदा

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  2. शुक्रिया यशोदा जी
    आपके सहयोग के लिए एवं
    ब्लॉग में जुड़ने लिए

    लिंक्स send करने के लिए भी
    धन्यवाद
    नया ब्लॉग बनाया है
    कृपया मार्गदर्शन बनाये रखें ।

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