Tuesday, 2 October 2012

कुछ तो कल के लिए

कुछ तो कल के लिए छोड़ा जाए
सब-कुछ न आज ही बटोरा जाए

आनी हैं नस्लें अभी और बहुत
कुछ तो उनके लिए सोचा जाए

कभी तो बाजुओं को हरकत दो
सिर्फ खून के आँसू न रोया जाए

अब तो ये दिल स्याह हो चला है
अपने आसुओं से इसे धोया जाए

नादिर काम करके भी दिखाया जाए
बाद उसके फिर चैन से सोया जाए

2 comments:

  1. बहुत उम्दा गज़ल .... आज कोई काम ही तो नहीं करना चाहता तो चैन से नींद भी नहीं आती

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत शुक्रिया संगीता जी

      और जिंदगी मे कुछ अच्छा काम भी किया जाए
      ताकि आसानी(शुकून) से दम निकले ।

      Delete