Thursday, 4 October 2012

मिली है सबको ऐसी छूट


छूट मिली है सबको खूब 
मै भी लूटूँ तू भी लूट

चमचों को तू रख ले पास
कौन करे फिर तुझसे पूछ

किसने देखी है कल की
कर ले पूरी इच्छा खूब


नाच रहे हैं बंदर भालू
करे मदारी खेल-कूद
 
हरी, नारंगी पिये आप
जनता पीये कड़ुआ घूट

लाख जतन से मिली है कुर्सी
जग रूठे पर तू न रूठ

13 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. बहुत शुक्रिया बहुत आभार यशोदा जी

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  2. कुर्सी की महिमा ... बहुत खूब ।

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    1. बहुत शुक्रिया संगीता जी आपके कोमेंट्स हमेशा प्रोत्साहित करते हैं ।

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    1. संगीता जी बहुत शुक्रिया ।

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  4. बहुत खूब ,,बहुत खूब...
    कुर्सी के मोह के आगे और कुछ कहाँ
    सूझे है इन कुर्सीवालों को..
    बेहतरीन रचना..
    :-)

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    1. बहुत शुक्रिया रीना जी

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  5. वाह ... बहुत खूब ...

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    1. बहुत शुक्रिया,आभार

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  6. सभी राजनेता एक ही थाली के चट्टेपट्टे.....

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  7. सही कहा अपने ......
    ब्लॉग पर आने के लिए आभार

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