Tuesday, 16 October 2012

सच को चिल्लाकर


सच को चिल्लाकर यूँ दबाया नहीं जाता
कस्ती को मगरमच्छों से चलाया नहीं जाता

उनकी तो हिफाज़त खुदा का जिम्मा है
इल्ज़ाम पैगंबरों पर लगाया नहीं जाता

किस तरह है सच पे झूठ की पहरेदारी
इस तरह से सच को छिपाया नहीं जाता

अजि हमने बदले हैं रूख कई तूफानों के
कोशिशों से सिरफिरों की घबराया नहीं जाता

नादिर वो जिनका शौक ही मदद-एइंसानी है 
उन्हें ख़ौफ़ ए इंसानी से डराया नहीं जाता 

12 comments:

  1. सच को चिल्लाकर यूँ दबाया नहीं जाता
    कस्ती को मगरमच्छों से चलाया नहीं जाता
    वाह ... बेहतरीन

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  2. बहुत शुक्रिया आपका ।

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  3. अजि हमने बदले हैं रूख कई तूफानों के
    कोशिशों से सिरफिरों की घबराया नहीं जाता
    ..सच कोशिश दिल से और जी जान से हो तो फिर तूफानों का रुख बदलते देर नहीं लगती ...बहुत सुन्दर सकरात्मक उर्जा भरी प्रस्तुति ..

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    1. बहुत शुक्रिया कविता जी ।
      आभार

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    1. मन्टू जी शुक्रिया।

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  5. अजि हमने बदले हैं रूख कई तूफानों के
    कोशिशों से सिरफिरों की घबराया नहीं जाता
    बढ़िया बात कही.

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    1. बहुत शुक्रिया शिखा जी ।
      आभार

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  6. उम्दा नज़्म..

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    1. बहुत शुक्रिया अमृता जी ।
      वीज़िट करते रहें।

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  7. बहुत आभार संगीता जी इसी तरह होंसला देते रहें |

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