Wednesday, 21 November 2012

कुछ नया-सा चाहता हूँ


आज करना कुछ नया-सा चाहता हूँ
आस के जज़्बात भरना चाहता हूँ

ये ग़ज़ल मेरी अधूरी है अभी तक
बस तेरी ख़ुशबू मिलाना चाहता हूँ

 शौक़ है ये और ज़िद भी है हमारी
दिल में दुश्मन के उतरना चाहता हूँ

ख़ौफ़जद है ज़िंदगी अब तो हमारी
प्यार के कुछ रंग भरना चाहता हूँ

दुश्मनों ने दोस्त बन कर जो किया था
गलतियाँ उनकी भुलाना चाहता हूँ

12 comments:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

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    1. बहुत शुक्रिया अदरणीय रविकर जी ।

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  2. कल 23/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत शुक्रिया यशवंत जी, नयी पुरानी हलचल में पुनः स्थान पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं ।
    आभार .....

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  4. वाह‍ ... बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने .

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    1. बहुत शुक्रिया आपका
      कृपया विजिट करते रहें ।

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  5. उत्कृष्ट प्रस्तुति शौक़ है ये और ज़िद भी है हमारी
    दिल में दुश्मन के उतरना चाहता हूँ

    ख़ौफ़जद है ज़िंदगी अब तो हमारी
    प्यार के कुछ रंग भरना चाहता हूँ

    दुश्मनों ने दोस्त बन कर जो किया था
    गलतियाँ उनकी भुलाना चाहता हूँ

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    1. बहुत शुक्रिया अज़ीज़ भाई कृपया विजिट करते रहें और कुछ त्रुटि लगे तो advice भी दिया करें अभी तो हम सीख ही रहें हैं।

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  6. बहुत बढ़ियाँ गजल...
    :-)

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  7. Khubsoorat...

    thanx for comming on my blog....visit again :)

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  8. बहुत शुक्रिया नुपुर जी ।
    आभार .....

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