Thursday, 6 December 2012

रेत में जैसे निशां खो गए


रेत में जैसे निशां खो गए
हमसे तुम ऐसे जुदा हो गए

रात आँखें ताकती ही रहीं
मेहमां जाने कहाँ सो गए

सौंप दी थी रहनुमाई जिन्हें
छोड़कर मझधार में खो गए

बोझ लेकर आपके पाप का
कांधे  में अपने उसे ढो गए

मिलने का वादा किया था मगर
हिचकियाँ देकर वो गुम हो गए

कौन आया है सदा के लिए
हम गए जो आज कल वो गए

3 comments:

  1. वाह ... बेहतरीन

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  2. बहुत शुक्रिया आपका

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  3. मिलने का वादा किया था मगर
    हिचकियाँ देकर वो गुम हो गए

    बहुत खूब ...

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