Sunday, 3 February 2013

प्यार ने तेरे बीमार बना रखा है


प्यार ने तेरे बीमार बना रखा है 
जा चुके कल का अख़बार बना रखा है
फासले दिल के तो मिटते नहीं हैं हमसे
चीन की खुद को दीवार बना रखा है
बेचकर गैरत अपनी सो रहे हैं कब से  
हमने उनको ही सरदार* बना रखा है
शोर सा इस दिल में मेरे ऐसा मचा है
जैसे गठबंधन-सरकार बना रखा है
चापलूसों का दरबार लगा है नादिर
झूठ को ही कारोबार बना रखा है

*सरदार = मुखिया

4 comments:

  1. बेचकर गैरत अपनी सो रहे हैं कब से
    हमने उनको ही सरदार* बना रखा है

    बहुत खूब .... सही कहा है ।

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  2. बहुत शुक्रिया संगीता जी
    अपने रचना को सराहा
    आभार .........

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  3. शोर सा इस दिल में मेरे ऐसा मचा है
    जैसे गठबंधन-सरकार बना रखा है ..

    बहुत ही तल्ख़ शेर ... लाजवाब ...

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  4. बहुत शुक्रिया आदरणीय दिगम्बर जी ....
    आभार ...

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