Thursday, 9 May 2013

सर्द हालात सही बर्फ पिघल जाएगी


रात के साथ मुलाक़ात निकल जाएगी
जिंदगी रेत की मानिंद फिसल जाएगी

आप जो आज मेहरबान हुये है हम पर
चाल हालात सुधरते ही बदल जाएगी

भोली आवाम है, वो चाँद पे क्या जाएगी
झूठे वादों के दिखावे में बहल जाएगी

मखमली ख्वाब है, ये प्यार तुम्हारा मेरा
इन्हीं यादों में मेरी शाम भी ढल जाएगी

मै ख़ुदा ज़ात से मायूस नहीं हूँ तेरी
सर्द हालात सही बर्फ पिघल जाएगी 

8 comments:

  1. Replies
    1. बहुत शुक्रिया अज़ीज़ भाई आपने रचना को सराहा.

      Delete
  2. वाह ... बेहतरीन

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत धन्यवाद आपका ।

      Delete
  3. Bahut hi lajawab gazal ... Sach ke sher .. Jindagi yun hi fisal jati hai ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. दिगम्बर जी आपने रचना के भाव को सराहा आपका दिल से धन्यवाद.
      काम की अधिकता की वजह से अपने और सबके ब्लॉग पर नहीं जा पा रहा हूँ, इसके लिए क्षमा करेंगे.
      उम्मीद है, बहुत जल्द फिर से वक्त दे पाऊँगा .

      Delete
  4. कामयाब अभिव्यक्ति है , मंगल कामनाएं ..
    आपकी कलम प्रभाव छोड़ने में कामयाब है !

    ReplyDelete
  5. आदरणीय सतीश जी हौसला अफजाई के लिए बहुत शुक्रिया।

    ReplyDelete