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Friday, 14 March 2014

क्षणिकाएँ

(एक)
तुम अक्सर कहते रहे
मत लिया करो
मेरी बातों को दिल पर
मज़ाक तो मज़ाक होता है
ये बातें जहाँ शुरू
वहीं ख़त्म ....
और एक दिन
मेरा छोटा सा मज़ाक
तार –तार कर गया
हमारे बरसों पुराने रिश्ते को
न जाने कैसे.........

   
 (दो)
घर की मालकिन ने
घर की नौकरानी को
सख्त लहजे में चेताया
आज महिला दिवस है
घर पर महिलाओं का प्रोग्राम है
कुछ गेस्ट भी आयेंगे
खबरदार !
जो कमरे से बाहर आई
टांगें तोड़ दूँगी........

Thursday, 18 October 2012

क्षणिकाएँ


मै खुश हूँ 

तुम बार-बार
मुझसे
झूठ बोलते रहे
बोलते रहे
मै बारबार
तुम्हारी बात सुनता रहा
मानता रहा
तुम खुश हो
बार-बार बेवकूफ
मुझे  बना पाते हो
मै खुश हूँ 
क्योंकि
तुम खुश हो ।


 थोड़ा सा पानी


आप ज़रूर पीयें
आर.ओ. पानी
आपका स्वस्थ रहना
जरूरी है  
पर हमारे लिए भी छोड़ दें
थोड़ा सा पानी
हमारे जीने के लिए
जरूरी है
गाँवों की नदियों में
पानी का बचा रहना 

           (आर.ओ.-रिवर्स ऑस्मोसिस वाटर प्यूरिफायर)


क्या हुआ

क्या हुआ
अगर तुम्हें
तुम्हारे कुत्ते ने काट लिया
तुम्हें तो ख़ुश होना चाहिए
वह भी सीख गया है
तुम्हारी तरह
तुम्हारा व्यवहार
तुम्हारा अपनापन |