Wednesday, 26 September 2012

बेटियाँ

सुबह उठती हैं
उन्हें पता है
अपनी जिम्मेदारियाँ
पूछतीं नहीं क्या करना है
बस लग जाती हैं 
काम में
रोज़ की तरह
सोचतीं नहीं
ठंड है या गर्मी
धूप है या बारिश
बस रोज़ की तरह
लग जाती हैं
सब-कुछ सँवारने-संभालने में
उन्हें बचपन से
सब-कुछ मालूम है
कुछ माँगती हैं
ज़िद ही करती हैं
उन्होंने अपनी हदें
पहले से
तय कर ली हैं

बेटियाँ
पूछने से पहले
बताने को तैयार
माँगने से पहले
समान तैयार
उन्हें पता नहीं है
कर भी पायेँगीं या नहीं
हाँ कोशिश ज़रूर करती हैं
कर पाये
ख़ुद से
शिकायत भी करती हैं

बेटियाँ
अपने लिए
कुछ नहीं माँगतीं
भाई के खिलौनों को छूकर
ख़ुश हो लेती हैं  
अपने लिए माँगने से
डरती भी हैं

बेटियाँ
खुशियाँ नहीं माँगतीं
खुशियाँ देना चाहती हैं
ख़ुश रहने से ज़्यादा
खुशियाँ बाँटना चाहती हैं
बेटियाँ
भाई से बराबरी नहीं चाहतीं
उनके साथ
चलना चाहती हैं
उनका साथ
देना चाहती हैं
सबको ख़ुश
रखना चाहती हैं
सबके काम
आना चाहती हैं

15 comments:

  1. बहुत ही भावुक और सार्थक रचना |ऐसे तो सारी पंक्तियाँ उम्दा भाव लिए है पर...."बेटियाँ अपने लिए कुछ नहीं माँगतीं भाई के खिलौनों को छूकर ख़ुश हो लेती हैं अपने लिए माँगने से डरती भी हैं " लाजवाब...|

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    1. बहुत शुक्रिया
      आपके जैसा अच्छा तो नहीं लिख पते पर जो दिल मे है उसे कागज़ मे उतार देते है ।
      पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद ।

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  2. बेटियाँ खुशियाँ ही देती हैं ... बहुत सुंदर

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    1. यकीनन बेटी का पिता होना हमारे लिए गौरव की बात है ।

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  3. बेटियाँ
    पूछने से पहले
    बताने को तैयार
    माँगने से पहले
    समान तैयार

    घर की नन्हीं बेटियों की बातें तैर गयी जेहन में ..सचमुच बहुत प्यारी होती हैं बेटियां

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  4. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 29/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. बहुत शुक्रिया यशोदा जी ।

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  5. मेरे ब्लॉग पर अपना अमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
    कविता ग़ज़ल आदि फोल्डर बनाने के लिए प्रत्येक कविता को लेबल कीजिए( सम्पादन में जाकर )
    फिर इन लेबल को ब्लॉग पर दिखने के लिए ...
    डिजाइन >ले आउट >गैजेट जोड़ें >show labels के क्रम का अनुसरण कीजिए और जहाँ इन्हें दिखाना चाहें वहां सेट कीजियेगा

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  6. बहुत सुन्दर रचना....
    आप इस सृजन के लिए बधाई के पात्र हैं....

    सादर
    अनु

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    1. बहुत शुक्रिया हौसला अफजाई के लिए
      हमने अपनी बिटिया के लिए लिखा था
      वैसे हर औरत बिटिया भी तो होती है

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    2. बिलकुल....
      हमने इसे अपनी नज़र से यानि एक बेटी की नज़र से पढ़ा....
      आपको और बिटिया को शुभकामनाएं.

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  7. बहुत सुन्दर ,प्यारी रचना...
    :-)

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    1. बहुत शुक्रिया हौसला अफजाई के लिए

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  8. Replies
    1. बहुत आभार अपने पसंद किया ahsha ji

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